Sunday, 6 November 2016

Story


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 🌹एक बार लैला भागी जा रही थी। सुना था कि मजनूँ कहीं बैठा है। मिलन के लिए पागल बनकर दौड़ी जा रही थी। रास्ते में इमाम चद्दर बिछाकर नमाज पढ़ रहा था लैला उसकी चद्दर पर पैर रखकर दौड़ गई। इमाम क्रुद्ध हो गया। उसने जाकर बादशाह को शिकायत कीः "मैं खुदा की बन्दगी कर रहा था.... मेरी चद्दर बिछी थी उस पर पैर रखकर वह पागल लड़की चली गई। उसने खुदाताला का और खुदा की बन्दगी करने वाले इमाम का, दोनों का अपमान किया है। उसे बुलाकर सजा दी जाय।"
इमाम भी बादशाह का माना हुआ था। बादशाह ने लैला को बुलाया, उसे डाँटते हुए कहाः
"मूर्ख पागल लड़की ! इमाम चद्दर बिछाकर खुदाताला की बन्दगी कर रहा था और तू उसकी चद्दर पर पैर रखकर चली गई ? तुझे सजा देनी पड़ेगी। तूने ऐसा क्यों किया ?"
"जहाँपनाह ! ये बोलते हैं तो सही बात होगी कि मैं वहाँ पैर रखकर गुजरी होऊँगी लेकिन मुझे पता नहीं था। एक इन्सान के प्यार में मुझे यह नहीं दिखा लेकिन ये इमाम सारे जहाँ के मालिक खुदाताला के प्यार में निमग्न थे तो इनको मैं कैसे दिख गई ? मजनूँ के प्यार में मेरे लिए सारा जहाँ गायब हो गया था जबकि इमाम सारे जहाँ के मालिक खुदाताला के प्यार में निमग्न थे तो इनको मैं कैसे दिख गई ? मजनूँ के प्यार में मेरे लिये सारा जहाँ गायब हो गया था जबकि इमाम सारे जहाँ के मालिक से मिल रहे थे फिर भी उन्होंने मुझे कैसे देख लिया ?"
बादशाह ने कहाः "लैला ! तेरी मजनूँ में प्रीति सच्ची और इमाम की बन्दगी कच्ची। जा तू मौज कर।"

🌹श्रद्धा करो तो ऐसी दृढ़ श्रद्धा करो। विश्वासो फलदायकः।
आत्मविचार करो तो बिल्कुल निष्ठुर होकर करो। उपासना करो तो असीम श्रद्धा से करो। कर्म करो तो बड़ी तत्परता से करो, मशीन की तरह बिल्कुल व्यवस्थित और फलाकांक्षा से रहित होकर करो। भगवान से प्रेम करो तो बस, पागल लैला की तरह करो, मीरा की तरह करो, गौरांग की तरह करो।

🌹गौरांग की तरह कीर्तन करने वाले आनंदित हो जाते हैं। तुमने अपनी गाड़ी का एक पहिया ऑफिस में रख दिया है, दूसरा पहिया गोदाम में रखा है। तीसरा पहिया पंक्चरवाले के पास पड़ा है। स्टीयरिंग व्हील घर में रख दिया है। इंजिन गेरेज में पड़ा है। अब बताओ, तुम्हारी गाड़ी कैसी चलेगी?

🌹ऐसे ही तुमने अपनी जीवन-गाड़ी का एक पुर्जा शत्रु के घर रखा है, एक पुर्जा मित्र के घर रखा है, दो पुर्जे फालतू जगह पर रखे हैं। तो यह गाड़ी कैसी चलेगी यह सोच लो। दिल का थोड़ा हिस्सा परिचितों में, मित्रों में बिखेर दिया, थोड़ा हिस्सा शत्रुओं, विरोधियों के चिन्तन में लगा दिया, थोड़ा हिस्सा ऑफिस में में, दुकान में रख दिया। बाकी दिल का जरा सा हिस्सा बचा उसका भी पता नहीं कि कब कहाँ भटक जाय ? बताओ, फिर उद्धार कैसे हो?                    
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 एक छोटी-सी कहानी :-
👉🏿एक बनिए से लक्ष्मी जी रूठ गई ।जाते वक्त बोली मैं जा रही हूँ और मेरी जगह टोटा (नुकसान ) आ रहा है ।तैयार हो जाओ।लेकिन मै तुम्हे अंतिम भेट जरूर देना चाहती हूँ।मांगो जो भी इच्छा हो।
बनिया बहुत समझदार था ।उसने 🙏 विनती की टोटा आए तो आने दो ।लेकिन उससे कहना की मेरे परिवार में आपसी प्रेम बना रहे ।बस मेरी यही इच्छा है।
लक्ष्मी जी ने तथास्तु कहा।
कुछ दिन के बाद :-
बनिए की सबसे छोटी बहू खिचड़ी बना रही थी ।उसने नमक आदि डाला और अन्य काम करने लगी ।तब दूसरे लड़के की बहू आई और उसने भी बिना चखे नमक डाला और चली गई ।इसी प्रकार तीसरी , चौथी बहुएं आई और नमक डालकर चली
गई । उनकी सास ने भी ऐसा किया ।
शाम को सबसे पहले बनिया आया ।पहला निवाला मुह में लिया । देखा बहुत ज्यादा नमक है।लेकिन वह समझ गया टोटा(हानि) आ चुका है।चुपचाप खिचड़ी खाई और चला गया । इसके बाद बङे बेटे का नम्बर आया ।पहला निवाला मुह में लिया ।पूछा पिता जी ने खाना खा लिया ।क्या कहा उन्होंने ?
सभी ने उत्तर दिया-" हाँ खा लिया ,कुछ नही बोले।"
अब लड़के ने सोचा जब पिता जी ही कुछ नही बोले तो मै भी चुपचाप खा लेता हूँ।
इस प्रकार घर के अन्य सदस्य एक -एक करके आए । पहले वालो के बारे में पूछते और चुपचाप खाना खा कर चले गए ।
रात को टोटा (हानि) हाथ जोड़कर बनिए से कहने लगा -,"मै जा रहा हूँ।"
बनिए ने पूछा- क्यों ?
तब टोटा (हानि ) कहता है, " आप लोग एक किलो तो नमक खा गए ।लेकिन बिलकुल भी झगड़ा नही हुआ । मेरा यहाँ कोई काम नहीं।"
निचौङ :-
झगड़ा कमजोरी , टोटा ,नुकसान की पहचान है।
जहाँ प्रेम है ,वहाँ लक्ष्मी का वास है।
सदा प्यार -प्रेम बांटते रहे।छोटे -बङे की कदर करे ।
जो बङे हैं ,वो बङे ही रहेंगे ।चाहे आपकी कमाई उसकी कमाई से बङी हो।
जरूरी नहीं जो खुद के लिए कुछ नहीं करते वो दूसरों के लिए भी कुछ नहीं करते।आपके परिवार में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने परिवार को उठाने में अपनी सारी खुशियाँ दाव पर लगा दी ।लेकिन गलतफहमी में सबकुछ अलग-थलग कर बैठते हैं। विचार जरूर करे
जहाँ प्रेम हैंं वहाँ विकास हैं ; लक्ष्मी है l
💕 💕
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 भगवान ने पहले
 गधे को बनाया
 और कहा तुम गधे होगे |
 तुम सुबह से शाम तक
 बिना थके काम करोगे | 
 तुम घास खाओगे और
 तुम्हारे पास अक्ल नहीं होगी
 और तुम 50 साल जियोगे |”
 गधा बोला –
 मै 50 साल नहीं जीना चाहता |
 ये बहुत ज्यादा है |
 आप मुझे 20 साल ही दें |
 भगवान ने कहा तथास्तु
———————————
 भगवान ने फिर कुत्ते को बनाया –
 और कहा तुम कुत्ते होगे|
 तुम घर की रखवाली करोगे |
 तुम आदमी के दोस्त होगे |
 तुम वह खाओगे
 जो आदमी तुम्हे देगा |
 तुम 30 वर्ष जियोगे|”
 कुत्ता बोला –
 मै 30 साल नहीं जीना चाहता |
 ये बहुत ज्यादा है |
 आप मुझे 15 साल ही दें |
 भगवान ने कहा तथास्तु...
———————————
 फिर भगवान ने बन्दर को बनाया –
 और कहा तुम बन्दर होगे |
 तुम एक डाली से दूसरी में
 उछलते कूदते रहोगे | 
 तुम 20 वर्ष जियोगे |”
 तो बन्दर बोला – मै
 20 साल नहीं जीना चाहता |
 ये बहुत ज्यादा है | 
 आप मुझे 10 साल ही दें |
 भगवान ने कहा तथास्तु……
 आखिर में भगवान ने
 आदमी को बनाया –
 और कहा तुम आदमी होगे |
 तुम धरती के सबसे अनोखे जीव होगे| 
 तुम अपनी अकलमंदी से
❤ सभी जानवरों के मास्टर होगे| 
❤ तुम दुनिया पे राज करोगे |
❤ तुम 20 साल जियोगे |”
💙 तो आदमी ने जवाब दिया –
💙 20 साल तो बहुत कम है|
💙 आप मुझे 30 साल दे
💙 जो गधे ने मना कर दिए,
💙 15 साल कुत्ते को नहीं चाहिए थे,
💗 10 साल बन्दर ने मना कर दिए,
💗 वह भी दे दें|
💗 भगवान ने कहा तथास्तु…
💗 और तीनो जानवरों के साल
💗 (30 साल, 15 साल, 10 साल),
💜 जो की जानवरों ने माना कर दिए थे,
💜 आदमी को मिल गए |
💜 तब से आज तक आदमी 
💜 20 साल इन्सान की तरह जीता है|
💜 शादी करता है और 
💛 30 साल गधो की तरह बिताता है|
💛 काम करता है और
💛 अपने ऊपर सारा भोझ उठाता है |
💛 और फिर उसके
💛 बच्चे जब बड़े हो जाते है तो
💖 वह 15 साल कुत्ते की तरह
💖 घर की रखवाली करता है,
💖 बच्चे जो उसे दे देते है
💖 वह खा लेता है |
💖 उसके बाद जब वह
💚 रिटायर हो जाता है| तो
💚 वह 10 साल बन्दर की तरह
💚 जीवन बिताता है
💚 एक घर से दूसरे घर या
💚 अपने एक बेटे या बेटी के घर से
❤ दूसरे बेटा या बेटी के घर पर
❤ अता- जाता रहता है और
❤ नए – 2 तरीके अपनाता है
❤ अपने पोतो को खुश करने मे
❤ और कहानी सुनाने में !!!!!!

👍  ये ही जीवन की सच्चाई है...

👌 BITTER BUT TRUE   
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 Superb Story. Can't resist from sharing it!!!

A little boy went to his old grandpa and asked, "What's the value of life?"

The grandpa gave him one stone and said, "Find out the value of this stone, but don't sell it."

The boy took the stone to an Orange Seller and asked him what its cost would be.

The Orange Seller saw the shiny stone and said, "You can take 12 oranges and give me the stone."

The boy apologized and said that the grandpa has asked him not to sell it.

He went ahead and found a vegetable seller.

"What could be the value of this stone?" he asked the vegetable seller.

The seller saw the shiny stone and said, "Take one sack of potatoes and give me the stone."

The boy again apologized and said he can't sell it.

Further ahead, he went into a jewellery shop and asked the value of the stone.

The jeweler saw the stone under a lens and said, "I'll give you 1 million for this stone." 

When the boy shook his head, the jeweler said, "Alright, alright, take 2 24karat gold necklaces, but give me the stone."

The boy explained that he can't sell the stone.

Further ahead, the boy saw a precious stone's shop and asked the seller the value of this stone.

When the precious stone's seller saw the big ruby, he lay down a red cloth and put the ruby on it.

Then he walked in circles around the ruby and bent down and touched his head in front of the ruby. "From where did you bring this priceless ruby from?" he asked.

"Even if I sell the whole world, and my life, I won't
be able to purchase this priceless stone."

Stunned and confused, the boy returned to the grandpa and told him what had happened. 

"Now tell me what is the value of life, grandpa?"

Grandpa said, 

"The answers you got from the Orange Seller, the Vegetable Seller, the Jeweler & the Precious Stone's Seller explain the value of our life...

You may be a precious stone, even priceless, but, people will value you based on their financial status, their level of information, their belief in you, their motive behind entertaining you, their ambition, and their risk taking ability. 

But don't fear, you will surely find someone who will discern your true value."

Respect yourself.

Don't sell yourself cheap. 
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A little boy went to his old grandpa and asked, "What's the value of life?"

The grandpa gave him one stone and said, "Find out the value of this stone, but don't sell it."

The boy took the stone to an Orange Seller and asked him what its cost would be.

The Orange Seller saw the shiny stone and said, "You can take 12 oranges and give me the stone."

The boy apologized and said that the grandpa has asked him not to sell it.

He went ahead and found a vegetable seller.

"What could be the value of this stone?" he asked the vegetable seller.

The seller saw the shiny stone and said, "Take one sack of potatoes and give me the stone."

The boy again apologized and said he can't sell it.

Further ahead, he went into a jewellery shop and asked the value of the stone.

The jeweler saw the stone under a lens and said, "I'll give you 1 million for this stone."

When the boy shook his head, the jeweler said, "Alright, alright, take 2 24karat gold necklaces, but give me the stone."

The boy explained that he can't sell the stone.

Further ahead, the boy saw a precious stone's shop and asked the seller the value of this stone.

When the precious stone's seller saw the big ruby, he lay down a red cloth and put the ruby on it.

Then he walked in circles around the ruby and bent down and touched his head in front of the ruby. "From where did you bring this priceless ruby from?" he asked.

"Even if I sell the whole world, and my life, I won't
be able to purchase this priceless stone."

Stunned and confused, the boy returned to the grandpa and told him what had happened.

"Now tell me what is the value of life, grandpa?"

Grandpa said,

"The answers you got from the Orange Seller, the Vegetable Seller, the Jeweler & the Precious Stone's Seller explain the value of our life...

You may be a precious stone, even priceless, but, people will value you based on their financial status, their level of information, their belief in you, their motive behind entertaining you, their ambition, and their risk taking ability.

But don't fear, you will surely find someone who will discern your true value."

Respect yourself.

Don't sell yourself cheap.

You are Unique.

No one can Replace you.
Value the value ....






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गैरहाज़िर  कन्धे----

विश्वास साहब अपने आपको भाग्यशाली मानते थे। कारण यह था कि उनके दोनो पुत्र आई.आई.टी. करने के बाद लगभग एक करोड़ रुपये का वेतन अमेरिका में प्राप्त कर रहे थे। विश्वास साहब जब सेवा निवृत्त हुए तो उनकी इच्छा हुई कि उनका एक पुत्र भारत लौट आए और उनके साथ ही रहे ; परन्तु अमेरिका जाने के बाद कोई पुत्र भारत आने को तैयार नहीं हुआ, उल्टे उन्होंने विश्वास साहब को अमेरिका आकर बसने की सलाह दी। विश्वास साहब अपनी पत्नी भावना के साथ अमेरिका गये ; परन्तु उनका मन वहाँ पर बिल्कुल नहीं लगा और वे भारत लौट आए।
दुर्भाग्य से विश्वास साहब की पत्नी को लकवा हो गया और पत्नी पूर्णत: पति की सेवा पर निर्भर हो गई। प्रात: नित्यकर्म से लेकर खिलाने–पिलाने, दवाई देने आदि का सम्पूर्ण कार्य विश्वास साहब के भरोसे पर था। पत्नी की जुबान भी लकवे के कारण चली गई थी। विश्वास साहब पूर्ण निष्ठा और स्नेह से पति धर्म का निर्वहन कर रहे थे।
एक रात्रि विश्वास साहब ने दवाई वगैरह देकर भावना को सुलाया और स्वयं भी पास लगे हुए पलंग पर सोने चले गए। रात्रि के लगभग दो बजे हार्ट अटैक से विश्वास साहब की मौत हो गई। पत्नी प्रात: 6 बजे जब जागी तो इन्तजार करने लगी कि पति आकर नित्य कर्म से निवृत्त होने मे उसकी मदद करेंगे। इन्तजार करते करते पत्नी को किसी अनिष्ट की आशंका हुई। चूँकि पत्नी स्वयं चलने में असमर्थ थी , उसने अपने आपको पलंग से नीचे गिराया और फिर घसीटते हुए अपने पति के पलंग के पास पहुँची। उसने पति को हिलाया–डुलाया पर कोई हलचल नहीं हुई। पत्नी समझ गई कि विश्वास साहब नहीं रहे। पत्नी की जुबान लकवे के कारण चली गई थी ; अत: किसी को आवाज देकर बुलाना भी पत्नी के वश में नहीं था। घर पर और कोई सदस्य भी नहीं था। फोन बाहर ड्राइंग रूम मे लगा हुआ था। पत्नी ने पड़ोसी को सूचना देने के लिए घसीटते हुए फोन की तरफ बढ़ना शुरू किया। लगभग चार घण्टे की मशक्कत के बाद वह फोन तक पहुँची और उसने फोन के तार को खींचकर उसे नीचे गिराया। पड़ोसी के नंबर जैसे तैसे लगाये। पड़ौसी भला इंसान था, फोन पर कोई बोल नहीं रहा था, पर फोन आया था, अत: वह समझ गया कि मामला गंभीर है। उसने आस–पड़ोस के लोगों को सूचना देकर इकट्ठा किया, दरवाजा तोड़कर सभी लोग घर में घुसे। उन्होने देखा -विश्वास साहब पलंग पर मृत पड़े थे तथा पत्नी भावना टेलीफोन के पास मृत पड़ी थी। पहले विश्वास और फिर भावना की मौत हुई। जनाजा दोनों का साथ–साथ निकला। पूरा मोहल्ला कंधा दे रहा था परन्तु दो कंधे मौजूद नहीं थे जिसकी माँ–बाप को उम्मीद थी। शायद वे कंधे करोड़ो रुपये की कमाई के भार के साथ अति महत्वकांक्षा से पहले ही दबे हुए थे।

लोग बाग लगाते हैं फल के लिए
औलाद पालते हैं बुढापे के लिए
लेकिन ......

कुछ ही औलाद अपना फर्ज निभा पाते हैं ।


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एक ऐसी कहानी जिसे पढ़कर कई लोगोँ के सोचने का नजरिया बदल गया....

डा. मार्क एक प्रसिद्ध कैंसर स्पैश्लिस्ट हैं, एक बार किसी सम्मेलन में भाग लेने लिए किसी दूर के शहर जा रहे थे। वहां उनको उनकी नई मैडिकल रिसर्च के महान कार्य के लिए पुरुस्कृत किया जाना था। वे बड़े उत्साहित थे व जल्दी से जल्दी वहां पहुंचना चाहते थे। उन्होंने इस शोध के लिए बहुत मेहनत की थी। बड़ा उतावलापन था, उनका उस पुरुस्कार को पाने के लिए।

उड़ने के लगभग दो घण्टे बाद उनके जहाज़ में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण उनके हवाई जहाज को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। डा. मार्क को लगा कि वे अपने सम्मेलन में सही समय पर नहीं पहुंच पाएंगे, इसलिए उन्होंने स्थानीय कर्मचारियों से रास्ता पता किया और एक टैक्सी कर ली, सम्मेलन वाले शहर जाने के लिए। उनको पता था की अगली प्लाईट 10 घण्टे बाद है। टैक्सी तो मिली लेकिन ड्राइवर के बिना इसलिए उन्होंने खुद ही टैक्सी चलाने का निर्णय लिया।

जैसे ही उन्होंने यात्रा शुरु की कुछ देर बाद बहुत तेज, आंधी-तूफान शुरु हो गया। रास्ता लगभग दिखना बंद सा हो गया। इस आपा-धापी में वे गलत रास्ते की ओर मुड़ गए। लगभग दो घंटे भटकने के बाद उनको समझ आ गया कि वे रास्ता भटक गए हैं। थक तो वे गए ही थे, भूख भी उन्हें बहुत ज़ोर से लग गई थी। उस सुनसान सड़क पर भोजन की तलाश में वे गाड़ी इधर-उधर चलाने लगे। कुछ दूरी पर उनको एक झोंपड़ी दिखी।
झोंपड़ी के बिल्कुल नजदीक उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी। परेशान से होकर गाड़ी से उतरे और उस छोटे से घर का दरवाज़ा खटखटाया। एक स्त्री ने दरवाज़ा खोला। डा. मार्क ने उन्हें अपनी स्थिति बताई और एक फोन करने की इजाजत मांगी। उस स्त्री ने बताया कि उसके यहां फोन नहीं है। फिर भी उसने उनसे कहा कि आप अंदर आइए और चाय पीजिए। मौसम थोड़ा ठीक हो जाने पर, आगे चले जाना।

भूखे, भीगे और थके हुए डाक्टर ने तुरंत हामी भर दी। उस औरत ने उन्हें बिठाया, बड़े सम्मान के साथ चाय दी व कुछ खाने को दिया। साथ ही उसने कहा, "आइए, खाने से पहले भगवान से प्रार्थना करें और उनका धन्यवाद कर दें।"

डाक्टर उस स्त्री की बात सुन कर मुस्कुरा दिेए और बोले,"मैं इन बातों पर विश्वास नहीं करता। मैं मेहनत पर विश्वास करता हूं। आप अपनी प्रार्थना कर लें।"

टेबल से चाय की चुस्कियां लेते हुए डाक्टर उस स्त्री को देखने लगे जो अपने छोटे से बच्चे के साथ प्रार्थना कर रही थी। उसने कई प्रकार की प्रार्थनाएं की। डाक्टर मार्क को लगा कि हो न हो, इस स्त्री को कुछ समस्या है। जैसे ही वह औरत अपने पूजा के स्थान से उठी, तो डाक्टर ने पूछा,"आपको भगवान से क्या चाहिेए? क्या आपको लगता है कि भगवान आपकी प्रार्थनाएं सुनेंगे?"
उस औरत ने धीमे से उदासी भरी मुस्कुराहट बिखेरते हुए कहा,"ये मेरा लड़का है और इसको एक रोग है जिसका इलाज डाक्टर मार्क नामक व्यक्ति के पास है परंतु मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैंं उन तक, उनके शहर जा सकूं क्योंकि वे दूर किसी शहर में रहते हैं। यह सच है की कि भगवान ने अभी तक मेरी किसी प्रार्थना का जवाब नहीं दिया किंतु मुझे विश्वास है कि भगवान एक न एक दिन कोई रास्ता बना ही देंगे। वे मेरा विश्वास टूटने नहीं देंगे। वे अवश्य ही मेरे बच्चे का इलाज डा. मार्क से करवा कर इसे स्वस्थ कर देंगे।"

डाक्टर मार्क तो सन्न रह गए। वे कुछ पल बोल ही नहीं पाए। आंखों में आंसू लिए धीरे से बोले,"भगवान बहुत महान हैं।"
(उन्हें सारा घटनाक्रम याद आने लगा। कैसे उन्हें सम्मेलन में जाना था। कैसे उनके जहाज को इस अंजान शहर में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। कैसे टैक्सी के लिए ड्राइवर नहीं मिला और वे तूफान की वजह से रास्ता भटक गए और यहां आ गए।)

वे समझ गए कि यह सब इसलिए नहीं हुआ कि भगवान को केवल इस औरत की प्रार्थना का उत्तर देना था बल्कि भगवान उन्हें भी एक मौका देना चाहते थे कि वे भौतिक जीवन में धन कमाने, प्रतिष्ठा कमाने, इत्यादि से ऊपर उठें और असहाय लोगों की सहायता करें।
वे समझ गए की भगवान चाहते हैं कि मैं उन लोगों का इलाज करूं जिनके पास धन तो नहीं है किंतु जिन्हें भगवान पर विश्वास है।
🌟🌟
हर इंसान को ये ग़लतफहमी होती है की जो हो रहा है, उस पर उसका कण्ट्रोल है और वह इन्सान ही सब कुछ कर रहा है ।।

पर अचानक ही कोई अनजानी ताकत सबकुछ बदल देती है कुछ ही सेकण्ड्स लगते हैं सबकुछ बदल जाने में फिर हम याद करते हैं परमपिता परमात्मा को।
🙏🙏🙏
या ईश्वर को छोड़ दो...
या ईश्वर के ऊपर छोड़ दो

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