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आहिस्ता चल जिंदगी,अभी
कई कर्ज चुकाना बाकी है
कुछ दर्द मिटाना बाकी है
कुछ फर्ज निभाना बाकी है
रफ़्तार में तेरे चलने से
कुछ रूठ गए कुछ छूट गए
रूठों को मनाना बाकी है
रोतों को हँसाना बाकी है
कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए
कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए
उन टूटे -छूटे रिश्तों के
जख्मों को मिटाना बाकी है
कुछ हसरतें अभी अधूरी हैं
कुछ काम भी और जरूरी हैं
जीवन की उलझ पहेली को
पूरा सुलझाना बाकी है
जब साँसों को थम जाना है
फिर क्या खोना ,क्या पाना है
पर मन के जिद्दी बच्चे को
यह बात बताना बाकी है
आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी
कई कर्ज चुकाना बाकी है
कुछ दर्द मिटाना बाकी है
कुछ फर्ज निभाना बाकी है !
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जिसमे याद ना आए वो तन्हाई किस काम की;
बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की;
बेशक इंसान को ऊंचाई तक जाना है;
पर जहाँ से अपने ना दिखें वो उँचाई किस काम की।
सुप्रभात
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जिसमे याद ना आए वो तन्हाई किस काम की;
बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की;
बेशक इंसान को ऊंचाई तक जाना है;
पर जहाँ से अपने ना दिखें वो उँचाई किस काम की।
सुप्रभात
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⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱
"समय बहाकर ले जाता है
नाम और निशान...
कोई हम में रह जाता है
कोई अहम में रह जाता है..
बोल मीठे ना हों तो हिचकियाँ भी नहीं आती....
घर बड़ा हो या छोटा,
अगर मिठास ना होंतो इंसान क्या....
..... चींटियां भी नहीं आती"...!!!
•●‼ आपका दिन शुभ हो ‼●•
🌿🌺💐🌺🌿
🙏 🙏
🌞 सुप्रभात 🌞
*G⭕⭕D 〽⭕➰N❗N G❗
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🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊
मान मिले सम्मान मिले,
सुख - संपत्ति का वरदान मिले.
💥💥💥
क़दम-क़दम पर मिले सफलता,
✨✨✨✨ *
सदियों* तक पहचान मिले।
☄☄☄☄☄☄
आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्यों को आने वाले नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ..?
🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉
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आज की नई सुबह इतनी
सुहानी हो जाए;
आपके दुखों की सारी बातें
पुरानी हो जाएं;
दे जाए इतनी खुशियां
ये नव वर्ष आपको;
कि ख़ुशी भी आपके
मुस्कुराहट की
दीवानी हो जाएं ।..
आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की बहुत-बहुत
शुभ-कामनायें...🙏🏻🙏🏻
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✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
😬😬😬😬😬😬😬😬😬😬😬
मच्छर की दहाड़
र््वावां न कोउ बना पावा
जब चाहा घूमेंन मेलन मा
हम रहेन गुरु अरु चेलन मा
घूमेंन मोटरन मा ठेलन मा
बिन टिकट चलेन हम रेलनमा
ना कबौ टिकट हम बनवावा
र््वावां न कोउ बना पावा
न दबी कबौ हम बोली ते
न मरी कबौ हम गोली ते
डेरु लागै ना ही टोली ते
ना ही पाथर अरु रोली ते
जेहि का पावा बसि धरि खावा
र््वावां न कोउ बना पावा
निर्दुन्द रहेन हम जेलन मा
महलन मा अउरु तबेलन मा
बाधक कलि केलि किलोलन मा
हन पारंगत सब खेलन मा
घट घट व्यापी हम कहलावा
र््वावां न कोउ बना पावा
हम पक्के मर्द कहाइत है
घर मा निर्भय घुसि जाइत है
पहिले तो हॉर्न बजाइत है
फिरि आपन डांसु गड़ाइत है
मनइन का खूनु बहुतु भावा
र््वावां न कोउ बना पावा
हमका डेराति हैं सब प्रानी
जब काटी यादि करैं नानी
जब मनई सुनै हमारि बानी
स्वावैं लगाय मच्छरदानी
तबहूँ काने मा भन्नावा
र््वावां न कोउ बना पावा
दुनिया मा डेंगू हम लायेन
हम ही मलेरिया फइलायेन
न कबौ कहूँ हम घबरायेन
घर घर मा परचम लहरायेन
केतनेव का जमपुर पहुंचावा
र््वावां न कोउ बना पावा
निरपेक्ष धरम हम अपनाई
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
लरिका जवान दाई माई
ना छाड़ी काहू का भाई
ना भेदभाव कछु अपनावा
र््वावां न कोउ बना पावा
खुश रहेन तलइया तालन मा
गंदी नाली औ नालन मा
हम लुकेन बगीचा थालन्ह मा
काटेन जुबतिन के गालन मा
"अनुज" ना कोउ पकरि पावा
र््वावां न कोउ बना पावा
✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
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ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये व्यवहार नहीं
धरा ठिठुरती है शीत से
आकाश में कोहरा गहरा है
बाग़ बाज़ारों की सरहद पर
सर्द हवा का पहरा है
सूना है प्रकृति का आँगन
कुछ रंग नहीं, उमंग नहीं
हर कोई है घर में दुबका हुआ
नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं
चंद मास अभी इंतज़ार करो
निज मन में तनिक विचार करो
नये साल नया कुछ हो तो सही
क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही
ये धुंध कुहासा छंटने दो
रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने दो
फागुन का रंग बिखरने दो
प्रकृति दुल्हन का रूप धर
जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता
घर -घर खुशहाली लायेगी
तब चैत्र-शुक्ल की प्रथम तिथि
नव वर्ष मनाया जायेगा
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
जय-गान सुनाया जायेगा✍
जय हिन्द जय भारत 🇮🇳
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आपकी ज़िंदगी में कभी गम ना हो;
आपकी आँखें कभी आंसुओं से नम ना हो;
आपको मिले ज़िंदगी भर की ख़ुशी;
भले ही उस ख़ुशी में हम ना हो।
क्रिस्मस की शुभकामनाएं!
25-12 2016
Dil se
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ये ना #पूछ मै #शराबी क़्यूं हुआ, 🤔
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बस यूं #समझ ले, 🤒
#गमों के #बोझ से, #नशे की #बोतल सस्ती लगी !!!😈
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कहाँ समझ पायेंगे वो सर्द रातों की चुभन, साहेब..
वो तो धूप में गुलाबी ठण्ड के किस्से लिखते हैं..
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आप धीरे धीरे मरने लगते हैं, अगर...
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नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की कविता "You Start Dying Slowly" का हिन्दी अनुवाद...
आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप करते नहीं कोई यात्रा,
अगर आप पढ़ते नहीं कोई किताब,
अगर आप सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,
अगर आप करते नहीं किसी की तारीफ़,
आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,
जब आप मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,
जब आप नहीं करने देते मदद अपनी,
न करते हैं मदद दूसरों की,
आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,
चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,
अगर आप नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार ,
अगर आप नहीं पहनते हैं अलग अलग रंग,
या आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान,
आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को,
और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को,
वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें,
और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को,
आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,
अगर आप नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को,
जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,
अगर आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,
अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,
अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को,
अपने जीवन में कम से कम एक बार किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की..
आप धीरे धीरे मरने लगते हैं....
इस सुन्दर कविता के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा का बहुत बहुत आभार....
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पकड़ लो हाथ मेरा प्रभु जगत में भीड़ भारी है,
कही मै खो नही जाऊं, जिम्मेदारी ये तुम्हारी है !!
सुकून उतना ही देना, प्रभु जितने से जिंदगी चल जाए,
औकात बस इतनी देना, कि,औरों का भला हो जाए,
रिश्तो में गहराई इतनी हो,कि, प्यार से निभ जाए,
आँखों में शर्म इतनी देना,कि, बुजुर्गों का मान रख पायें,
साँसे पिंजर में इतनी हों, कि,बस नेक काम कर जाएँ,
बाकी उम्र ले लेना, कि,औरों पर बोझ न बन जाएँ ।
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"सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए
और
जिंदगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए !!
👌👌👌👌👌😇😇
तज़ुर्बा है मेरा.... मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने .....पाँव फिसलते देखे हैं...!
👌👌👌👌😇😇
जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों,
यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नही जायेगा!
जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ....
जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रह गए...
👌👌👌👌👌👌👌
पैसा इन्सान को ऊपर ले जा सकता है;
लेकिन इन्सान पैसा ऊपर नही ले जा सकता......
👌👌👌👌👌👌👌👌
कमाई छोटी या बड़ी हो सकती है....
पर रोटी की साईज़ लगभग सब घर में एक जैसी ही होती है।
:👌 शानदार बात👌
इन्सान की चाहत है कि उड़ने को पर मिले,
और परिंदे सोचते हैं कि रहने को घर मिले...
👌👌👌👌👌😇😇
कर्मो' से ही पहेचान होती है इंसानो की...
महेंगे 'कपडे' तो,'पुतले' भी पहनते है दुकानों में !!..
😎😎😀😃😄
''छोटी छोटी बातें दिल में रखने से
बड़े बड़े रिश्ते कमजोर हो जाते हैं"
कभी पीठ पीछे आपकी बात चले
तो घबराना मत ...
बात तो "उन्हीं की होती है"..
जिनमें कोई " बात " होती है
निंदा उसीकी होती हे जो जिंदा हैँ
मरने के बाद तो सिर्फ तारीफ होती हे ।
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किसी सख़्त पिता की तरह होते हैं साल...
...मुट्ठी में ढेरों तारीखें, लेकिन खर्च करने को रोज़ एक ही देता है!
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बड़ी बेवफ़ा हो जाती है ग़ालिब, ये घड़ी भी सर्दियों में,
5 मिनट और सोने की सोचो तो, 30 मिनट आगे बढ़ जाती है
😊😉
मत ढूंढो मुझे इस दुनिया की तन्हाई में,
ठण्ड बहुत है, मैं यही हूँ, अपनी रजाई में..
😝😝
तमाम राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के बीच मेरी छोटी सी लोकल समस्या
सारी रात गुज़र जाती है इसी कश्मकश में
ये हवा कहां से घुस जाती है रजाई में
😜😝
सुबह सुबह आकर सोये हुए को जगाने के लिये उसकी रजाई खींच लेने को महापाप की श्रेणी में रखा जायेगा
😝
अगर इस समय कोई सुबह सुबह किसी पर ठंडा पानी डाल दे,
तो वो घटना भी आतंकवादी हमले के अंतर्गत मानी जायेगी
😛😛😛
किसी की रजाई खींचना देशद्रोह के बराबर माना जायेगा और रजाई में घुसकर ठंडे पैर लगाना छेड़छाड़ का अपराध माना जायेगा
😳😆😆
इस बरसाती ठण्ड के मौसम में रजाई के अंदर रहना ही श्रेष्ठ कर्म है
और टमाटर की चटनी के साथ पकोड़े, चाय मिलना मोक्ष की प्राप्ति
😁😂😂
ऐ सर्दी इतना न इतरा
अगर 👉हिम्मत है तो जून में आ।।
Good morning 😁
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दिल से नाज़ुक नही,
. . . दुनिया में कोई चीज साहब,
लफ्ज़ का वार भी
. . . . खंजर की तरह लगता है..!!
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क्या खूब लिखा है किसी ने...🖊
आगे सफर था और पीछे हमसफर था...🖊
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता...🖊
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी...🖊
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...🖊
मुद्दत का सफर भी था और बरसो
का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते...🖊
यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की
मगर पानी मे जहर था...🖊
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते...🖊
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए...🖊
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए...🖊
वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता...🖊
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता🖊
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...🖊
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर...🖊
"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है...🖊
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"...🖊
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया...🖊
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा...🖊
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ...🖊
बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है...🖊
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...🖊
दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली...🖊
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी...🖊
भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की...🖊
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है...🖊
हंसने की इच्छा ना हो,
तो भी हसना पड़ता है...🖊
.
कोई जब पूछे कैसे हो..?
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...🖊
.
ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों,
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है...🖊
"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती,
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...🖊
दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट, ये ढूँढ रहे हैं की
मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं...🖊
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं...🖊
मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ,
कि...
पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम...🖊
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने,
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम...🖊
अगर दिल को छू जाये तो शेयर जरूर करे...
▄▄
(●_●)
╚═►
🌴🌴🌴🌴🌴🌴
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कविता for all Daddy's👤😘
वो पिता👤 होता है
वो पिता👤 ही होता है
जो अपने बच्चो👦 को अच्छे
विद्यालय में पढ़ाने के लिए
दौड🏃भाग करता है...
उधार लाकर donation भरता
है, जरूरत पड़ी तो किसी के भी
हाथ🙏 पैर भी पड़ता है
....... वो पिता👤 होता हैं ।।
हर कॉलेज🏬 में साथ👥साथ
घूमता है, बच्चे के रहने के
लिए होस्टल🏨 ढुँढता है...
स्वतः फटे कपडे पहनता है
और बच्चे के लिए नयी जीन्स👖
टी-शर्ट👕 लाता है
.......... वो पिता👤 होता है ।।
खुद खटारा फोन📞 चलाता है पर
बच्चे के लिए स्मार्ट📱 फोन लाता है...
बच्चे की एक आवाज सुनने के
लिए, उसके फोन में पैसा💰 भराता है
....... वो पिता👤 होता है ।
बच्चे के प्रेम विवाह के निर्णय पर
वो नाराज़😔 होता है और गुस्से
में कहता है सब ठीक से देख
लिया है ना, "आप कुछ
समझते भी है?" यह सुन कर
बहुत रोता😢 है
.......वो पिता👤 होता हैं ।।
बेटी की विदाई पर दिल की
गहराई से रोता😭 है,
मेरी बेटी का ख्याल रखना हाथ
जोड़👏 कर कहता है
......... वो पिता👤 होता है ।।
पिता का प्यार दिखता नहीं है
सिर्फ महसूस किया जाता है।
माँ पर तो बहुत कविता लिखी
गयी है पर पिता पर नहीं।
पिता का प्यार क्या है दुनिया
को बता दो। सहमत हो तो इसे
ज्यादा से ज्यादा forward करे।
😥😰😢🙏 पापा जब दुखी होते हैं तो माँ की तरह नहीं रोते। शायद इसलिए 90% पापा हार्ट अटैक से मर जाते हैं।
so please Respect And Obey Father...
क्योंकि पापा.....पापा होते हैं👏
Love u papa😘😘
दोस्तों सही लगे तो जरुर फोरवॅड करना ।।।
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सोनम कि कोई ख़ता तो साबित कर,
जो बुरी है तो बुरी साबित कर।
तुझे चाहा है सोनम ने कितना तू क्या जाने,
चल सोनम बेवफा ही सही,
तू अपनी वफ़ा तो साबित कर।
- गुलज़ार गुप्ता (सोनम गुप्ता के पापा)😜
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महबूब ही तो बदला है सोनम ने
फिर ताज्जुब कैसा,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते हैं।
- इरशाद गुप्ता (सोनम गुप्ता के चाचा)
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गुलज़ार द्वारा लिखी किताब The longest short story of my life with grace जो उन्होंने अपने धर्मपत्नी राखी" को समर्पित की है, से एक अंश:
लोग सच कहते हैं -
औरतें बेहद अजीब होतीं है
रात भर पूरा सोती नहीं
थोड़ा थोड़ा जागती रहतीं है
नींद की स्याही में
उंगलियां डुबो कर
दिन की बही लिखतीं
टटोलती रहतीं है
दरवाजों की कुंडियाॅ
बच्चों की चादर
पति का मन..
और जब जागती हैं सुबह
तो पूरा नहीं जागती
नींद में ही भागतीं है
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं
हवा की तरह घूमतीं, कभी घर में, कभी बाहर...
टिफिन में रोज़ नयी रखतीं कविताएँ
गमलों में रोज बो देती आशाऐं
पुराने अजीब से गाने गुनगुनातीं
और चल देतीं फिर
एक नये दिन के मुकाबिल
पहन कर फिर वही सीमायें
खुद से दूर हो कर भी
सब के करीब होतीं हैं
औरतें सच में, बेहद अजीब होतीं हैं
कभी कोई ख्वाब पूरा नहीं देखतीं
बीच में ही छोड़ कर देखने लगतीं हैं
चुल्हे पे चढ़ा दूध...
कभी कोई काम पूरा नहीं करतीं
बीच में ही छोड़ कर ढूँढने लगतीं हैं
बच्चों के मोजे, पेन्सिल, किताब
बचपन में खोई गुडिया,
जवानी में खोए पलाश,
मायके में छूट गयी स्टापू की गोटी,
छिपन-छिपाई के ठिकाने
वो छोटी बहन छिप के कहीं रोती...
सहेलियों से लिए-दिये..
या चुकाए गए हिसाब
बच्चों के मोजे, पेन्सिल किताब
खोलती बंद करती खिड़कियाँ
क्या कर रही हो?
सो गयी क्या ?
खाती रहती झिङकियाँ
न शौक से जीती है ,
न ठीक से मरती है
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
कितनी बार देखी है...
मेकअप लगाये,
चेहरे के नील छिपाए
वो कांस्टेबल लडकी,
वो ब्यूटीशियन,
वो भाभी, वो दीदी...
चप्पल के टूटे स्ट्रैप को
साड़ी के फाल से छिपाती
वो अनुशासन प्रिय टीचर
और कभी दिख ही जाती है
कॉरीडोर में, जल्दी जल्दी चलती,
नाखूनों से सूखा आटा झाडते,
सुबह जल्दी में नहाई
अस्पताल मे आई वो लेडी डॉक्टर
दिन अक्सर गुजरता है शहादत में
रात फिर से सलीब होती है...
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं
सूखे मौसम में बारिशों को
याद कर के रोतीं हैं
उम्र भर हथेलियों में
तितलियां संजोतीं हैं
और जब एक दिन
बूंदें सचमुच बरस जातीं हैं
हवाएँ सचमुच गुनगुनाती हैं
फिजाएं सचमुच खिलखिलातीं हैं
तो ये सूखे कपड़ों, अचार, पापड़
बच्चों और सारी दुनिया को
भीगने से बचाने को दौड़ जातीं हैं...
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
खुशी के एक आश्वासन पर
पूरा पूरा जीवन काट देतीं है
अनगिनत खाईयों को
अनगिनत पुलो से पाट देतीं है.
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
ऐसा कोई करता है क्या?
रस्मों के पहाड़ों, जंगलों में
नदी की तरह बहती...
कोंपल की तरह फूटती...
जिन्दगी की आँख से
दिन रात इस तरह
और कोई झरता है क्या?
ऐसा कोई करता है क्या?
सच मे, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं..
गुलज़ार
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अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन ←_←←_←←_←किया है
था मैं नींद में और. ←_←
मुझे इतना
सजाया जा रहा था....←_←
बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था....←_←←_←
ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर
में....←_←←_←←_←←_←
बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा
था....←_←←_←←_←←_←
था पास मेरा हर अपना
उस
वक़्त....←_←←_←←_←←_←
फिर भी मैं हर किसी के
मन
से
भुलाया जा रहा था...←_←←_←←_←←_←
जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों
से....←_←←_←←_←
उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर
लुटाया जा रहा था...←_←←_←←_←
मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर....←_←←_←
जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...
काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर....←_←←_←←_←
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जा रहा था....←_←←_←
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलों में
मेरे
लिए....←_←←_←←_←
उन्हीं दिलों के हाथों,
आज मैं जलाया जा रहा था!!!
🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂
👌 लाजवाब लाईनें👌
🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂
पल←_←भर←_←की←_←ज़िन्दगी←_←है←_←दोस्तो←_←प्यार←_←करना←_←सीखो←_←नफरत←_←नही
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सर्जिकल दोहे
रहिमन कभी ना राखिये, काला धन छुपाए,
जाने कब मोदी बब्बा, सर्जिकल कर जाये...
हरे लाल सब नोट को, जोड़त बने अमीर,
एक रात में हो गए, राजा रंक फ़कीर...
नोटन की बोरी भरी, दिया कभी ना टैक्स,
रोते आज दहाड़ कर, कैसे करें रिलैक्स...
ब्लेक मनी की चाह में, भूल गए दिन रात,
एक चाल में मिल गयी, उनको शय और मात...
मेहनत का ही जोड़िये, कहे लक्ष्मीनारायण
समझ गए सो ठीक है,वरना नारायण नारायण ,,,..
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बड़ी बेवफ़ा हो जाती है ग़ालिब, ये घड़ी भी सर्दियों में,
5 मिनट और सोने की सोचो तो, 30 मिनट आगे बढ़ जाती है
😊😉
मत ढूंढो मुझे इस दुनिया की तन्हाई में,
ठण्ड बहुत है, मैं यही हूँ, अपनी रजाई में..
😝😝
तमाम राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के बीच मेरी छोटी सी लोकल समस्या
सारी रात गुज़र जाती है इसी कश्मकश में
ये हवा कहां से घुस जाती है रजाई में
😜😝
सुबह सुबह आकर सोये हुए को जगाने के लिये उसकी रजाई खींच लेने को महापाप की श्रेणी में रखा जायेगा
😝
अगर इस समय कोई सुबह सुबह किसी पर ठंडा पानी डाल दे,
तो वो घटना भी आतंकवादी हमले के अंतर्गत मानी जायेगी
😛😛😛
किसी की रजाई खींचना देशद्रोह के बराबर माना जायेगा और रजाई में घुसकर ठंडे पैर लगाना छेड़छाड़ का अपराध माना जायेगा
😳😆😆
इस बरसाती ठण्ड के मौसम में रजाई के अंदर रहना ही श्रेष्ठ कर्म है
और टमाटर की चटनी के साथ पकोड़े, चाय मिलना मोक्ष की प्राप्ति
😁😂😂
ऐ सर्दी इतना न इतरा
अगर 👉हिम्मत है तो जून में आ।।
Good morning 😁
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💕Zindgi kabhi mushkil to kabhi aasaan hoti hai
💕Kabhi 'uff' to kabhi 'wah' hoti he,
💕Na bhoolna kabi apni 'SMILE' ko,
💕Kyoki is se har mushkil aasaan hoti hai.... 💕
Good morning
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👌चंद लाइने दोस्तों के नाम:-
"क्यूँ मुश्किलों में साथ देते हैं "दोस्त"
"क्यूँ गम को बाँट लेते हैं "दोस्त"
"न रिश्ता खून का न रिवाज से बंधा है !
"फिर भी ज़िन्दगी भर साथ देते हैं "दोस्त. ". 😍“प्रेम से रहो दोस्तों जरा सी बात पे रूठा नहीं करते,
पत्ते वहीं सुन्दर दिखते हैं जो शाख से टूटा नही करते✍”
•••••••जय श्री राम
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ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं,
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं।"
शायरी नहीं चेतावनी है।
आयकर विभाग.. 🤓
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माया की माया गई , दिये मुलायम रोय।
इह झटके का अब यहाँ इलाज न होगा कोय।।
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रहिमन रद्दी हो गई, बड़ी करेन्सी नोट।
यूपी औ पंजाब में कइसे मिलिही वोट।।
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मुद्रा माटी हो गई, मोदी भए कुम्हार।
नेता मिलि के रो रहे, ऐसा हुआ प्रहार।।
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रहिमन आँखन ना दिखे, भीतर लागी चोट।
रहि रहि गारी दे रहे ,कह मोदी को खोट।।
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दीदी जीजा धुल गए, धरे रह गए ठाठ।
मोदी ऐसा धो रहा, खड़ी हो गई खाट।।
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दीदी गुर्राए यहाँ, वहाँ बहन जी रोय।
उधर केजरी दंग है; क्यों हमको मोदी धोय।।
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मन था उदास,
बड़ी हसरतों से निगाहें दरवाजे पर थी;
सहसा कुछ खटका सा हुआ
उल्लसित मन से हम दरवाजे की ओर बढ़े
लेकिन यह क्या
वह मन का भ्रम था;
दिल बैठने सा लगा
बुझे मन से लौट ही रहे थे,
कि सहसा एक आवाज आई
"दीदी"...
मन की वीणा झंकृत हो उठी
मन मयूर नाच उठा
यह कोई स्वप्न नहीं
तुम साक्षात पधार चुकी थी:
धन्य हो भगवन धन्य
अब मन नहीं था उदास
माहौल हो गया था ख़ुशगवार
मन मृदंग के बज रहे थे तार
वह आ चुकी थी
सचमुच वो आ चुकी थी😂😂
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"मत शिक्षा दो इन बच्चों को चांद- सितारे छूने की।
चांद- सितारे छूने वाले छूमंतर हो जाएंगे।
अगर दे सको, शिक्षा दो तुम इन्हें चरण छू लेने की,
जो मिट्टी से जुङे रहेंगे, रिश्ते वही निभाएंगे....🌟
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स्वर्ग में सब कुछ है लेकिन मौत नहीं है, 🐬
गीता में सब कुछ है लेकिन झूठ नहीं है,
दुनिया में सब कुछ है लेकिन किसी को सुकून नहीं है,
और 🐬
आज के इंसान में सब कुछ है लेकिन सब्र नहीं
किसी ने क्या खूब कहा है-🐬
ना खुशी खरीद पाता हू ना ही गम बेच पाता हू फिर भी मै ना जाने क्यु हर रोज कमाने जाता हू....
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बचपन मे चिल्लर माँग कर टाफी खानी पड़ती थी
अब चिल्लर ना होने की वजह से टाफी खानी पड़ती है।
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कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने... ✍🏻✍🏻✍🏻
मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये...✍🏻✍🏻✍🏻
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हरिवंशराय बच्चन जी की एक खूबसूरत कविता,,
"रब" ने. नवाजा हमें. जिंदगी. देकर;
और. हम. "शौहरत" मांगते रह गये;
जिंदगी गुजार दी शौहरत. के पीछे;
फिर जीने की "मौहलत" मांगते रह गये।
ये कफन , ये. जनाज़े, ये "कब्र" सिर्फ. बातें हैं. मेरे दोस्त,,,
वरना मर तो इंसान तभी जाता है जब याद करने वाला कोई ना. हो...!!
ये समंदर भी. तेरी तरह. खुदगर्ज़ निकला,
ज़िंदा. थे. तो. तैरने. न. दिया. और मर. गए तो डूबने. न. दिया . .
क्या. बात करे इस दुनिया. की
"हर. शख्स. के अपने. अफसाने. हे"
जो सामने. हे. उसे लोग. बुरा कहते. हे,
_जिसको. देखा. नहीं उसे सब "खुदा". कहते. है. 🌻🙏🌻🙏🌻
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ना तंग करो इतना हम सताए हुए हैं मोहब्बत का गम दिल पे उठाए हुए हैं खिलौना समझ कर हम से ना खेलो हम भी उसी खुदा के बनाए हुए हैं !!
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मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है बड़ी शातिर है ये दुनिया मजा लेने का कोई न कोई बहाना ढूंढ लेती है !!
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Har Subah Ki Dhoop Kuch Yaad Dilati Hai , Har Phool Ki Khushbu Ek Jadu Jagati Hai, Chahu Na-Chahu Kitna Bhi Par , Subah-Subah Aapki Yaad Aa Hi Jati Hai…
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दर्द क्या होता है बताएगे किसी रोज इस दिल की गजल सुनाएंगे किसी रोज उड़ने दो इन परिंदों को आजाद फिजाओ में हमारे हुए तो लौट आएंगे किसी रोज !!
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उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है उनके इंतजार में दिल तरसता है क्या कहें इस कम्बख्त दिल को अपना हो कर किसी और के लिए धड़कता है !!
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बनकर एहसास मेरी धड़कन के पास रहती हो बनकर तस्वीर मेरी आंखो के पास रहती हो एक बात तो बताओ आज पूछता हूं तुमसे क्या मेरे बिना तुम भी उदास रहती हो !!
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उनको अपने हाल का हिसाब क्या देते सवाल सारे गलत थे जवाब क्या देते वो तीन लफ्जों की हिफाजत ना कर सके उनके हाथ में जिंदगी की पूरी किताब क्या देते !!
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मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है बड़ी शातिर है ये दुनिया मजा लेने का कोई न कोई बहाना ढूंढ लेती है !!
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मेरी मौत के सबब आप बने इस दिल के रब आप बने पहले मिसाल थे वफ़ा की जाने यूँ बेवफ़ा कब आप बने!!
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कितनों ने ही खरीदा सोना,
मैने एक 'सुई' खरीद ली,
सपनों को बुनने जितनी 'डोरी' खरीद ली।
सबने जरूरतों से ज्यादा बदले नोट,
मैंने अपनी ख्वाहिशे बदल ली,
'शौक- ए- जिन्दगी' कुछ कम कर लिए,
फिर बगैर पैसों में ही
'सुकून-ए-जिन्दगी' खरीद ली...
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कतारें थककर भी खामोश हैं,नजारे बोल रहे हैं।
नदी बहकर भी चुप है मगर किनारे बोल रहे हैं।
ये कैसा जलजला आया है देश में इन दिनों,
झोंपडी मेरी खडी है और महल उनके डोल रहे हैं।।
परिंदों को तो रोज कहीं से गिरे हुए दाने जुटाने थे।
पर वे क्यों परेशान हैं जिनके घरों में भरे हुए तहखाने थे।
हमें तो आधे पेट सोने की आदत है सदा से,
सुना है ,आज उन्हें भी नींद नहीं आ रही है, जिन्हें लंगर चलाने थे।।👌👌
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गाँव, गाँव अब नही रहा
ना मिले गजोधर कक्कू,
ढूँढ़े मिलय न हंसिया खुरपी
घर घर होइगा चक्कू।।
राजनीति अब करंय लगे हं
गाँव के सगले टोरबा,
खन्धा वाली टाठी होइ गइ
ढूँढ़े मिलय न खोरबा।।
गाँव म सगले रोड बनी हय
नही परय अब गरदा,
खेते खेते टेक्टर नधिगें
मिलय न हर अउ बरदा।।
सात बजे से गामन मा हय
100 नम्बर के रेरा,
दर दर हउली खुलि गय
दारू खोरन के हय डेरा।।
छोट छोट अब घर के झगड़ा
पहुँचि जता हय थाना मा,
पीजा बर्गर चाउमीन हय
कढ़ी मिलय ना खाना मा।।
घर घर अइसन फूट पड़ी
देवर भउजाई लपटंय,
मनसेरुऐ सब बाहर बाहर
मेहररुऐ खुब झपटंय।।
एक घरेन मा देखन चारि चारि
ठे जरत लाग हय चूल्हा,
मनसेरूआ त बइठे अइसन
जइसन होय ऊ दूल्हा ।।
माटी वाले घर ना देखन
बनिगें सगले पक्का,
दर दर सगले कोटा खुलिगा
मिलय न जोन्हरी मक्का ।।
बहुत बहुत हम दिखन फलाने
का का तोंहसे रोई,
गामउ मा अब नींद नही हय
कइसन के हम सोई।।
कवि: ✍🏼✍🏼
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रख होंसला मुसाफ़िर
वो मंज़र भी आएगा,
लाइन मे खड़ा रह , तेरा भी नम्बर आयेगा
थककर न बैठ ए,
मंज़िल के मुसाफ़िर,
मंज़िल भी मिलेगी और
तेरा भी नोट बदला जायेगा
😊😊😊🙏🏽😊😊😊
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रहिमन लाठी राखिये, सरसों तेल पिलाय।
जाने कल किस मोड़ पे , बंद समर्थक मिल जाये।
ऐसी लाठी पेलिये, भाग सके न कोई।
बंद - बंद फिर ना करे , जब लाल पिछवाड़ा होइ।
😡😡😡
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वो माचिस की सीली डब्बी,
वो साँसों में आग..
बरसात में सिगरेट सुलगाये बड़े दिन हो गए...।
एक्शन का जूता
और ऊपर फॉर्मल सूट...
बेगानी शादी में दावत उड़ाए बड़े दिन हो गए...।
ये बारिशें आजकल
रेनकोट में सूख जाती हैं...
सड़कों पर छपाके उड़ाए बड़े दिन हो गए.... ।
अब सारे काम सोच समझ कर करता हूँ ज़िन्दगी में....
वो पहली गेंद पर बढ़कर छक्का लगाये बड़े दिन हो गए...।
वो ढ़ाई नंबर का क्वेश्चन पुतलियों में समझाना...
किसी हसीन चेहरे को नक़ल कराये बड़े दिन हो गए.... ।
जो कहना है
फेसबुक पर डाल देता हूँ....
किसी को चुपके से चिट्ठी पकड़ाए बड़े दिन हो गए.... ।
बड़ा होने का शौक भी
बड़ा था बचपन में....
काला चूरन मुंह में तम्बाकू सा दबाये बड़े दिन हो गए.... ।
आजकल खाने में मुझे
कुछ भी नापसंद नहीं....
वो मम्मी वाला अचार खाए
बड़े दिन हो गए.... ।
सुबह के सारे काम
अब रात में ही कर लेता हूँ....
सफ़ेद जूतों पर चाक लगाए बड़े दिन हो गए..... ।
लोग कहते हैं
अगला बड़ा सलीकेदार है....
दोस्त के झगड़े को अपनी लड़ाई बनाये
बड़े दिन हो गए..... ।
वो साइकल की सवारी
और ऑडी सा टशन...
डंडा पकड़ कर कैंची चलाये
बड़े दिन हो गए.... ।
किसी इतवार खाली हो तो
आ जाना पुराने अड्डे पर...
दोस्तों को दिल के शिकवे सुनाये
बड़े दिन हो गए...........
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